जमुई के गिद्धौर में खरीफ फसल में जलजमाव के बाद अब रबी सीजन में भी खेतों में नमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। पूरे क्षेत्र में गेहूं की बुवाई अभी भी 80 प्रतिशत लंबित है, क्योंकि खेत सूख नहीं पा रहे हैं।
किसान रंजीत यादव, बेनी यादव, महेंद्र यादव, अनिल यादव और वासुकी मंडल जैसे कई किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की नमी के बाद अब रबी में भी खेत तैयार होने में देरी हो रही है। जिले के विभिन्न निचले इलाकों में आज भी नमी बनी हुई है, जिससे पानी निकलने के बावजूद खेत इतने गीले हैं कि जुताई भी संभव नहीं हो पा रही है।
बारिश के पानी जमाव से किसान परेशान
कृषक मजदूर मिट्टी पलटने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बेमौसम वर्षा के बाद पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने से हर वर्ष यह स्थिति बनती है। कई मौजा ऐसे हैं जहां लंबे समय तक पानी फंसा रहता है। यही कारण है कि इस बार गेहूं की बुवाई काफी पिछड़ गई है।
पिछले वर्ष दिसंबर माह तक पूरे प्रखंड में रबी की सभी फसलों की बुवाई 100 प्रतिशत पूरी हो गई थी, लेकिन इस बार गेहूं की बुवाई 80 प्रतिशत पर अटकी है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामाधार चौधरी ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों से पानी पूरी तरह निकल चुका है और वे जुताई योग्य हो चुके हैं, वहां बिना देर किए फसल लगा दें।
गेहूं बुवाई का सही समय 15 दिसंबर तक
उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई के लिए 15 दिसंबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है, इसलिए किसान समय रहते तैयारी कर लें। किसी भी दिक्कत की स्थिति में वे कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
किसानों का यह भी कहना है कि यदि खेतों में नमी बरकरार रहे तो कुछ फसलों, जैसे सरसों, का उत्पादन ज्यादा होता है।

