अंधराठाढ़ी प्रखंड के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के बरसाम गांव के पनपीबी पोखर से खुदाई के दौरान कर्णाट कालीन काले पत्थर की भगवान विष्णु की मूर्ति मिली है. प्रतिमा करीब 700 साल पुरानी बताई जा रही है. माना जाता है कि यह मूर्तियां कर्णाट वंश के कार्यकाल की हैं. जब मुगल आक्रमण कर रहे थे, उस दौरान तब के राजा ने इस मूर्तियों को तालाब के अंदर छुपा दिया था. हालांकि मूर्ति मिलने की खबर जंगल में लगे आग की तरह चारों ओर फैल गई. देखते ही देखते बरसाम गांव विष्णु भगवान के जयघोष से गूंज उठा. लोगों ने खुशी से झूमते हुए कहा कि गांव में जल्द ही एक मंदिर का निर्माण किया जाएगा, जहां मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर पूजा अर्चना की जाएगी ।
जिसने भी ये खबर सुनी, मूर्ति के दर्शन के लिए दौड़ पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि वो कई पीढ़ियों से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते रहे हैं. उनकी पूजा और तपस्या से प्रसन्न होकर खुद नारायण उनके पास चलकर आ गए हैं. स्थानीय लोग इस मूर्ति को गांव में ही रखने की मांग कर रहे हैं. वहीं पुरातत्वविदों की मांग दूसरी है. ऐसे में पुरातत्वविद् का क्या कहना है, यह जानना भी जरूरी है।
इस बारे में जानकारी देते हुए पुरातत्त्वविद् डॉ. शिव कुमार बताते हैं कि यह विष्णु की मूर्ति कर्णाट कालीन और करीब 700 वर्ष पुरानी है. डॉ. मिश्र ने ये भी बताया कि मूर्ति भग्न है और भग्न प्रतिमा की पूजा शास्त्र सम्मत नहीं है. इसलिए इसे संग्रहालय में जमा किया जाना चाहिए. उन्होंने इस बारे में मधुबनी के जिला पदाधिकारी को भी सूचना देकर इसके संरक्षण का अनुरोध किया है. सूचना मिलते ही रूद्रपुर थाना एसएचओ आयशा कुमारी दलबल के साथ वहां पहुंची. वहीं अंधराठाढ़ी अंचल अधिकारी प्रियदर्शनी ने भी पहुंचकर जायजा लिया और विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक चौकीदार को वहां फिलहाल तैनात कर दिया है.

