सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय और डॉ.शेख शौकत हुसैन पर लगाए गए यूएपीए कानून को रद्द करने की मांग को लेकर भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने बेगूसराय में डीएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया है। कार्यकर्ताओं ने माले ऑफिस से झंडा-बैनर के साथ प्रतिरोध मार्च निकाला और डीएम ऑफिस के सामने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मौके पर भाकपा-माले के जिला सचिव दिवाकर कुमार और चंद्रदेव वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार विरोधियों की आवाज दबाने की एक बड़ी साजिश कर रही है। इसी के लिए अरुंधति रॉय और डॉ.शेख शौकत हुसैन के खिलाफ यूएपीए कानून के तहत उस पर मुकदमा दर्ज कराया है। केंद्र की मोदी सरकार इस कानून का उपयोग विरोधियों को जेल भेजने और आवाज दबाने के लिए कर रही है।केंद्र सरकार के खिलाफ जो भी आवाज उठाता है, वैसे लोगों के खिलाफ इस कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। चाहे वह विपक्ष का नेता हो, पत्रकार हो या सामाजिक कार्यकर्ता हो। उन पर इस कानून के तहत कार्रवाई कर जेल भेज दिया जाता है। विरोध प्रदर्शन के माध्यम से यूएपीए कानून को रद्द करने की मांग की जा रही है। अगर इस कानून को रद्द नहीं किया गया तो लगातार आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक किया जाएगा।
इस चुनाव में जनता ने मोदी सरकार को सबक सिखाया है। इसके बावजूद मोदी सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस कानून को उपयोग कर रही है। विरोध की आवाज को कुचलकर नफरत और तानाशाही वातावरण को और बढ़ावा दिया जा रहा है। बेगूसराय में भी पुलिस प्रशासन धमका कर नफरत का वातावरण तैयार कर रही है। पिछले दिनों देवेश चंद्र ठाकुर ने जो बयान दिया, उसका यहां के सांसद गिरिराज सिंह भी समर्थन करते हैं।

