पहले पूर्णिया लोकसभा में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत और अब रुपौली विधानसभा उपचुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने बिहार में नये राजनीतिक संकेत दे दिए हैं। एनडीए और महागठबंधन, दो खेमे की मजबूरी के बीच अब जनता ने विकल्प की तलाश शुरू करने की शुरुआत का संकेत कहीं न कहीं दे दिया है। साथ ही पूरे देश मे हुए उपचुनाव के नतीजे एनडीए केलिए निराशाजनक रहे हैं। इन नतीजों ने कहीं न कहीं एनडीए और मुख्य रूप से भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है। इन नतीजों को राजनीतिक विश्लेषक 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव का संकेत भी मान रहे हैं।
इसी परिणाम पर दरभंगा भाजपा के युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष बालेंदु झा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रुपौली विधानसभा उपचुनाव के परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अब पार्टी के सिम्बोल के साथ साथ उम्मीदवार का चयन भी अहम मुद्दा बन गया है। इसे बिहार में लोकसभा से विधानसभा तक पूर्णिया की जनता ने सार्वजनिक कर दिया है।
उनके इस बयान मे भी कहीं न कहीं भाजपा की चिंता झलकती दिखी है। बालेंदु झा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए पोस्ट किया है कि
पांच बार की विधायक पहुंची तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह ने रुपौली में बाजी मारी,पिछली बार के चुनाव में रहे थे उपविजेता। चुनाव चिन्ह के साथ-साथ जनता से जुड़ाव भी अब चुनाव में प्रतिनिधि चयन का एक अहम मुद्दा हो गया है। इसे बिहार में लोकसभा से विधानसभा तक पूर्णिया की जनता ने सार्वजनिक कर दिया।

यह प्रतिक्रिया चुनाव परिणाम आने के ठीक बाद की है। परंतु ऐसे प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। साथ ही इस तरह का परिणाम जनता के लिए सुखद संकेत माना जा सकता है। परंतु चुनाव चिन्ह के भरोसे रहने वाले जनप्रतिनिधियों केलिए खतरे की घंटी भी हो सकती है।

