दरभंगा से आशीष झा की रिपोर्ट
भाजपा का गढ़ माने जाने वाली दरभंगा शहर की सीट पर लगातार 20 वर्षो से भाजपा का कब्जा है। पर हर बार जीत का मार्जिन घटते गया है। गत चुनाव में भी वर्तमान विधायक संजय सरावगी का विरोध काफी मुखर था। खासकर दरभंगा शहर में बड़ी संख्या और भाजपा के कोर वोटर माने जाने ब्राह्मण वर्ग में खासा नाराजगी दिख रही थी। पर कोई अन्य सशक्त विकल्प न होने और राजद की जीत के डर से ब्राह्मणों का ज्यादा वोट इधर उधर नहीं हुआ और मार्जिन घटने के बाबजूद फिर से संजय सरावगी जीत गए। पर इसबार प्रशांत किशोर के दांव ने भाजपा की मुश्किल इस परम्परागत सीट पर बढ़ा दी है।
दरअसल, अवकाश प्राप्त आईपीएस अधिकारी आरके मिश्रा के दरभंगा शहर से चुनाव लड़ने की चर्चा शुरू होते ही ब्राह्मण वर्ग में उन्हें मजबूत विकल्प के रूप में देखा जाने लगा था। गुरुवार को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा होते ही सोशल मीडिया में भी यही रुझान स्पष्ट झलकने लगा। आमलोगों के साथ साथ दरभंगा में सक्रिय प्रमुख ब्राह्मण संगठनों द्वारा भी खुलकर इसका स्वागत और समर्थन में पोस्ट दिखने लगे। शाम होते होते विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म पर उनके बयान और न्यूज भी चलने लगे।
इसके साथ ही माना जाता है कि भाजपा का एक बड़ा खेमा, जिसे संजय सरावगी का विरोधी गुट भी माना जाता है, वे भी आरके मिश्रा का समर्थन अंदरूनी रूप से करेंगे। कुछ भाजपा नेताओं ने तो घोषणा होते ही आरके मिश्रा को फोन कर बधाई देते हुए पार्टी से अलग हटकर समर्थन का वादा भी किया।
बताते चलें कि आर के मिश्रा दरभंगा में दो वर्षों तक आईजी के पद पर रह चुके हैं। उनका दरभंगा एवं मधुबनी के कई बड़े भाजपा नेताओं से नजदीकी सम्बन्ध रहा है जो आज भी कायम है। साथ ही ब्राह्मण समाज के व्यवसायी, समाजसेवी, प्रोफेशनल्स आदि पर साथ भी उनकी अच्छी पकड़ है जो व्यक्तिगत रूप से आर के मिश्रा की।मदद पार्टी लाइन से हटकर कर सकते हैं।
आरके मिश्रा का नाम सामने आते ही कहीं न कहीं भाजपा में भी इन बिंदुओं पर मंथन शुरू हो चुका है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि इन सब के बाबजूद भाजपा टिकट देने में अति आत्मविश्वास का परिचय देगी या परिस्थितियों के अनुसार सीट को हर हाल में जीतने केलिए अन्य विकल्प का भी विचार करेगी।

