पूर्णिया में प्रशांत किशोर की जन सुराज को सभी सात सीटों पर करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। वे न सिर्फ सीट जीतने में नाकाम रहे, बल्कि जमानत भी जब्त हो गया। किसी एक विधानसभा में जन सुराज के कैंडिडेट रनर तक नहीं बन सके। पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह का जादू बेअसर साबित हुआ। चुनाव जीतने की सारी स्ट्रेटजी फेल हो गई।
जन सुराज ने सभी 7 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारे। धुआंधार जनसंपर्क, रॉकेट प्रचार-प्रसार और पार्टी के सूत्रधारों का भी समर्थन काम नहीं आया। पूर्णिया सदर से संतोष कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे। इन्हें महज 3,701 वोट आया। मंत्री लेसी सिंह के गढ़ धमदाहा में जन सुराज के राकेश कुमार चौथे स्थान पर रहे। वे सिर्फ 1,804 वोट ही ला सके।
रुपौली में जन सुराज प्रत्याशी 5वें नंबर पर रहे
वहीं रुपौली में अमोद कुमार को मुंह की खानी पड़ी। 3,048 वोट के साथ वे 5 नंबर पर रहे। बनमनखी में मनोज कुमार ऋषि 6,676 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कसबा में मोहम्मद इत्तेफाक आलम 3,430 वोटों के साथ सातवें स्थान पर आए। बायसी में शहनवाज आलम 2,389 वोट ला सकें। इन्हें पांचवां स्थान आया। अमौर में मो अफरोज 3,802 वोट के साथ पांचवे स्थान पर सिमट गए।
इन विधानसभा क्षेत्रों में राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह और रणनीतिकार किशोर का प्रभाव सीमित रहा। खासकर उन इलाकों में जहां सामान्य जनता पहले से ही दूसरी पार्टियों के गहरे नेटवर्क से जुड़ी रही।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट बोले- प्रशांत किशोर का राजनीतिक प्रयोग विफल
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पंकज भारतीय कहते हैं कि पूर्णिया में जन सुराज को मिले परिणाम न सिर्फ पार्टी की स्थानीय कड़ी को कमजोर दिखाते हैं, बल्कि इस ओर भी संकेत देते हैं कि प्रशांत किशोर का राजनीतिक प्रयोग ग्रास रुट पर विफल रहा
जमानत जब्त हो जाना इसकी एक बड़ी मिसाल है। सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व का भरोसा ही काफी नहीं है, असली जीत के लिए जमीनी स्तर पर बूथ-ब्रिगेड और वोटर्स के बीच गहराई से जुड़ना होगा।

